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कवि परिचय / साहित्यिक परिचय

नाम

संजीव कुमार बर्मन - हिन्दी कवि, गीतकार

निवास

दिल्ली, भारत

वेबसाइट (Website)

www.sanjeevkumarburman.com

ई – मेल

1958skburman@gmail.com

मोबाइल

+91-9818034375

पिता का नाम

स्वर्गीय श्री राज कुमार बर्मन

माता का नाम

श्रीमती निर्मल बर्मन

जन्म तिथि

१८ मार्च, १९५८

जन्म स्थान

दिल्ली, भारत

शैक्षिक योग्यता

बी. कॉम (दिल्ली विश्वविद्यालय, भारत)

भूतपूर्व कार्य

१९७८ में दिल्ली प्रशासन में Homoeopathic Pharmacist के पद पर कार्य आरम्भ किया, गर्दन के दर्द के करण, १९९० से १९९७ तक ४ Spinal Code के Operation करवाए, चलने फिरने में तकलीफ होते हुए भी कार्य करने जाते रहे, मई २०१० में Accident होने पर मजबूरी में नौकरी छोड्नी पड़ी |

प्रकाशित कृतियां

(i).  प्रथम काव्य संग्रह 'सफर में फूल चुने मैंने' अनुराधा प्रकाशन, दिल्ली से २०१४ में प्रकाशित हो चुका है

(ii).  सांझा काव्य संग्रह 'काव्य सुगंध' अनुराधा प्रकाशन, दिल्ली से २०१५ में प्रकाशित हो चुका है

लेखन

बचपन से ही लेखन में रूचि थी, दिल्ली विश्वविद्यालय के कई मंचो से काव्य पाठ किया | कार्य सथल पर के कई मंचो से काव्य पाठ किया |

आज-कल

अपने पुत्र और पुत्र वधू के व्यवसाय में कुछ समय देते हैं, बाकी समय लेखन में लगाते हैं, बहुत सी सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संस्थाओ जुड़े हैं, काव्य पाठ के लिए जाते रहते हैं |

पत्र पत्रिकाएं

(i).  राम लाल आनंद कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय की पत्रिकाएं

(ii).  समाचार पत्र दैनिक प्रभात

(iii).  उत्कर्ष मेल - हिन्दी पत्र पाक्षिक, अनुराधा प्रकाशन, दिल्ली में प्रकाशित

(iv).  श्री खाटू श्याम शरणम हिन्दी पत्रिका मासिक, अनुराधा प्रकाशन, दिल्ली में प्रकाशित

रेडियो प्रसारण

श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा साक्षात्कार, दिल्ली FM Rainbow पर, प्रोग्राम ‘Love Birds’, जिसका प्रसारण १३-०५-२००६ को हुआ

संजीव कुमार बर्मन

मेरा प्रथम काव्य संग्रह 'सफर में फूल चुने मैंने' अनुराधा प्रकाशन, दिल्ली से २०१४ में प्रकाशित हो चुका है, इस में मैंने जिंदगी के सभी आयामों पर हास्य-व्यंग, प्रेम, श्रृँगार, करूणा, चिंतन, साहित्यक, सामाजिक एवम् राजनीती पर लिखने का प्रयास किया है | इस संग्रह में कविता, ग़ज़ल, गीत, चुटकले एवम् लघु कथा के रूप में प्रस्तुत हैं |

जिंदगी के सफर में फूल भी मिले तो काँटे भी, फूलों में सुगंध भी मिली और काँटे की टीस भी, सफर में जो देखा, सीखा, समझा और महसूस किया, इस काव्य संग्रह में प्रस्तुत हैं | आशा है ये मेरी छोटी सी कोशिश आप को पसंद आएगी |

लोगो को अक्सर तीन भागों में बाँटा जाता है, उच्च आय वर्ग, मध्यम आय वर्ग, निम्न आय वर्ग, ऊपर वाले ने मुझे तीनो वर्गो से साक्षात्कार करने का, उन से सीखने का, उन को समझने का, उन की समस्यो को जानने का, उन के रहन सहन, उन की बोल चाल, उन के गमो और खुशियों को करीब से महसूस करने का मौका मिला |

प्रथम काव्य संग्रह 'सफर में फूल चुने मैंने' अनुराधा प्रकाशन, दिल्ली से प्रकाशित का विमोचन २६-०१-२०१५ को नरसिंह सेवा सदन, पीतम पूरा, दिल्ली - ११००८८ में नारायणी साहित्य अकादमी, दिल्ली के सहयोग किया गया |

श्री प्रताप फ़ौजदार, श्री चिराग जैन, श्री शंभू शिकार (अभिनेता लाफ्टर चैलेंज और वाह! वाह! क्या बात है) एवम् अन्य कवियो ने सामूहिक रूप से किया |

मंच संचालन श्री सुनील हापुरीया जी ने किया, श्रीमती कविता मल्होत्रा, श्री चेंदरमणी, श्रीमती पुष्पा, श्री मनोज कामदेव, श्रीमती रूचि कपूर, श्री उमा शंकर शर्मा, श्री अरविंद त्यागी, श्री एन जी त्रिपाठी, श्री सुजीत शौकीन, श्री विजेंद्र मंसोत्रा, श्री प्रेम बिहारी मिश्र, श्री जसवंत सिंह, श्री आशीष, सुश्री बबली, श्रीमती छाया गुप्ता ने काव्य पाठ किया और काव्य सम्मेलन की शोभा बढाई |

अंत मे श्री मनमोहन शर्मा जी (प्रकाशक, अनुराधा प्रकाशन, दिल्ली) ने काव्य संग्रह 'सफर में फूल चुने मैंने' के बारे में अपने विचार रखे और सब लोगो का धनयवाद किया |

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